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पीएम अपना वादा कब निभाएंगे?' उमर अब्दुल्ला के एक सवाल से गरमाई सियासत, BJP पर लगाए गंभीर आरोप

 


श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि भाजपा ने इस मुद्दे पर कई बार वादे किए, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने, विधायकों को तोड़ने और "बैकडोर राजनीति" करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन चुकी है। उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) ने भी इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन तेज करने की तैयारी कर ली है।

राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर केंद्र पर सवाल

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कटड़ा में ट्रेन सेवा के उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि उस समय यह भरोसा दिलाया गया था कि राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी भाजपा नेताओं से पूछा जाता है कि राज्य का दर्जा कब बहाल होगा, तो उनका जवाब केवल इतना होता है कि "उचित समय आने पर" यह फैसला लिया जाएगा। उनके अनुसार यह जवाब अब लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह "उचित समय" कब आएगा, जिसका लगातार जिक्र किया जा रहा है। उनके मुताबिक जम्मू-कश्मीर की जनता अब स्पष्ट जवाब चाहती है।

भाजपा नेताओं से किया सीधा सवाल

अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर भाजपा नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक मंच से राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था, तो स्थानीय भाजपा नेताओं को यह बताना चाहिए कि उस वादे को लागू करने में देरी क्यों हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वास्तव में राज्य का दर्जा तभी बहाल किया जाएगा जब जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार बनेगी, तो भाजपा नेताओं को इस बारे में जनता के सामने खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को भ्रम की स्थिति में रखने के बजाय स्पष्ट नीति और समयसीमा बताई जानी चाहिए।

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी

मुख्यमंत्री के बयान के साथ ही उनकी पार्टी ने भी आंदोलन की रणनीति तेज कर दी है। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने घोषणा की है कि 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक प्रमुखता हासिल कर सकता है।

विधायक को पार्टी बदलने का आरोप

उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के एक विधायक को कथित रूप से पार्टी छोड़ने के लिए भारी आर्थिक प्रलोभन और मंत्री पद का प्रस्ताव दिया गया।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विधायक को 20 से 30 करोड़ रुपये तक का प्रस्ताव दिए जाने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने इस संबंध में सार्वजनिक मंच से कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्म जरूर कर दिया।

भाजपा की ओर से इस तरह के आरोपों को पहले भी कई बार राजनीतिक बयानबाजी करार दिया जाता रहा है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनती रही हैं।

परिसीमन को लेकर भी उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में हुए परिसीमन (Delimitation) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नई विधानसभा सीटों के गठन का उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगियों को राजनीतिक लाभ पहुंचाना था।

उनका कहना था कि परिसीमन के बाद सात नई सीटें बनाई गईं और उनमें से अधिकांश पर भाजपा को सफलता मिली। उनके अनुसार इससे यह संदेश गया कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राजनीतिक संतुलन बदलना था।

हालांकि परिसीमन आयोग ने अपनी प्रक्रिया को संवैधानिक प्रावधानों और निर्धारित मानकों के अनुरूप बताया था। इस विषय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय रही है।

'ऑपरेशन लोटस' का किया जिक्र

उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में कथित "ऑपरेशन लोटस" का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उन राज्यों में भी सरकार बनाने की कोशिश करती है जहां उसे स्पष्ट जनादेश नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्षी दलों के नेताओं और विधायकों को अपने पक्ष में लाकर सरकार बनाने की रणनीति अपनाती है। मुख्यमंत्री के अनुसार इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बजाय "बैकडोर राजनीति" कहा जा सकता है।

अन्य राज्यों का भी दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री ने अपने आरोपों के समर्थन में कई राज्यों की राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां राजनीतिक दलों में विभाजन देखने को मिला। इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल और पंजाब का भी उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों को कमजोर करने का प्रयास करती रही है।

उन्होंने कहा कि यदि अन्य राज्यों में इस तरह की राजनीतिक घटनाएं हो सकती हैं, तो जम्मू-कश्मीर में ऐसी आशंकाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

भाजपा की ओर से क्या हो सकता है जवाब?

भाजपा पहले भी इस प्रकार के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताती रही है। पार्टी का कहना रहा है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से जनता का समर्थन हासिल करती है और विपक्ष के आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं।

राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर भी भाजपा नेताओं ने पहले कई बार कहा है कि उचित समय आने पर इस विषय में निर्णय लिया जाएगा। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

राज्य का दर्जा क्यों बना हुआ है बड़ा मुद्दा?

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने और राज्य के पुनर्गठन के बाद से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है। कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और जनता के अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए राज्य का दर्जा बहाल किया जाना आवश्यक है।

दूसरी ओर केंद्र सरकार का रुख रहा है कि इस विषय पर उचित समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

आगे क्या?

20 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ सकता है। आने वाले दिनों में इस विषय पर केंद्र सरकार, भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ताजा बयान ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

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